Rabies in dogs in hindi, कुत्तों में रेबीज, बचाव और उपचार

Rabies in dogs in hindi ( कुत्तों में रेबीज )

Rabies in dogs in hindi
Rabies in dogs in hindi

आज हम बात करेंगे Rabies in dogs in hindi के बारे में, इंसान और कुत्ते का साथ एक छोटे समय का नहीं बल्कि सदियों पुराना है और ये सब कुत्ते की अपने मालिक के प्रति पूर्ण वफादारी के कारणों है सच में कुत्ता एक बहुत ही प्यारा और लाभकारी जानवर है और इंसानों के साथ इसकी सदयों से अच्छी दोस्ती रही है इसलिए इंसान इसे सदियों से ही पालता आ रहा है l

रेबीज एक गंभीर वायरल संक्रमण है जो स्तनपायी के तंत्रिका तंत्र को बहुत बुरी तरह से नुकसान पहुंचता है अगर किसी स्तनपायी में रेबीज की पुष्टि हो गयी तो आप ये समझे कि उसकी मौत की भी पुष्टि हो गयी, Rabies in dogs in hindi इसी से आप इस संक्रमण की गंभीरता का अनुमान लगा सकते हैं lइंसानों में भी इसकी वजह से बहुत मौतें होती हैं l

Lyssavirus है इसका मुख्य कारण

रेबीज का मुख्य कारण Lyssavirus है यह इतना छोटा होता है कि आप इसे आँखों या साधारण लैंस द्वारा नहीं देख सकते हैं इसे देखने के लिए सूक्ष्मदर्शी की आवश्यकता होती है यह जानवरों की लार के द्वारा दुसरे जीवों में फैलता है जबकि संक्रमित जानवर के पंजों की खरोंच से भी ये दुसरे जीवों में चला जाता है l

सबसे ज्यादा कुत्तों में पाया जाता है रेबीज

Rabies in dogs in hindi
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वैसे तो यह वायरस स्तनपायी में किसी को भी हो सकता है जैसे कुत्ता, बंदर, बिल्ली आदी में लेकिन कुत्तों में यह सबसे ज्यादा पाया जाता है इंसानों में भी अगर हम इससे मौतों की बात करें तो हर साल पचास हज़ार मौतों का कारण यही वायरस बनता है l Rabies in dogs in hindi

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क्या हैं रेबीज के लक्षण ( Rabies in dogs in hindi )

Rabies in dogs in hindi जब रेबीज के वायरस तंत्रिका तंत्र में पहुँच कर उस पर हमला कर देते हैं तब रेबीज के लक्षण दिखाई देने शुरू होते हैं l शुरू में ये साधारण अन्य बिमारियों के लक्षणों की तरह ही होते हैं लेकिन बाद में हालत बद से बदतर होती जाती है जिसका अंत मौत के साथ ही होता है l इसके लक्षण हम तीन स्टेज में देखते हैं l

1- Prodromal stage

ये रेबीज की शुरूआती स्टेज है और इसमें जो लक्षण सामने आते हैं वह साधारण बिमारी की तरह ही सामने आते हैं जैसे गर्दन की मांस पेशियों में अकड़न होना, सुस्त हो जाना, खाना – पीना बंद कर देना या बिलकुल न के बराबर हो जाना और व्यबहार में बदलाव हो जाना l ये लक्षण केवल दो से तीन दिन तक ही ऐसे रहते हैं उसके बाद हालत और ज्यादा बिगड़ने लगती है l

2- Excitative stage

इस स्टेज में हालत लगातार खराब होती जाती है और वायरस तंत्रिका तंत्र को बुरी तरह से प्रभावित करना शुरू कर देता है व्यबहार में बदलाव बहुत ज्यादा आ जाता है और आक्रमकता बहुत ज्यादा बढ़ जाती है कुत्ते को पानी से डर लगने लगता है l

3- Last stage

लास्ट स्टेज में कुत्ते की हालत इतनी ज्यादा खराब हो चुकी होती है कि आप खुद चाहेंगे कि उसे मौत आ जाए क्योंकि उसकी हालत अब आपसे भी देखीं नहीं जायेगी l कुत्ते के मुहं से झाग आने शुरू हो जाते हैं, उसके जबड़े अकड़ जाते हैं, लकवे के साथ दौरे पड़ने शुरू हो जाते हैं मुंह से बहुत ज्यादा लार आने लगती है l अब आपके पास इस स्तिथि में दो ही रास्ते होते हैं या तो आप खुद कुत्ते को मौत देकर उसके दर्द का जल्दी अंत कर दें या फिर उसे तिल तिल मरता देखें l

बचाव के तरीके

कुत्ते को वायरस से बचने का सबसे अच्छा और सबसे ज़रूरी तरीका है, उसके रेबीज न हो उसके लिए टीका लगवाना यह सबसे ज्यादा असरकारक तरीका है इससे आपके कुत्ते की सुरक्षा तो है ही साथ ही आपके पूरे परिवार की भी सुरक्षा हो जाती है l दुसरे अपने कुत्ते को बाहर अकेला और बिना पट्टे के नहीं लेकर जाएँ जिससे वह आवारा कुत्तों से दूर रहे l

कुत्तों में रेबीज का उपचार

रेबीज को शुरू के दिनों में ही पहचान लेना बहुत कठिन है क्योंकि इसके लक्षण शुरू में और दूसरी बिमारियों से मिलते जुलते होते हैं लेकिन जब तक हम इसे पहचान पाते है तब उसे किसी भी उपचार का कोई फायदा नहीं होता उसकी मौत निश्चित ही होती है इसलिए आप पहले से ही अपने कुत्ते को टीका लगवाएं और रेबीज से बचकर रखें l

कुत्ते के कब लगवाएं टीका

एंटी रेबीज टीका कुत्ते के तब लगाया जाता है जब उसकी उम्र तीन महीने की हो जाती है और ये टीका उसे एक साल तक रेबीज से बचाता है एक साल पूरा होने पर फिर उसे पशु – चिकित्सक के पास ले जाएँ और कुत्ते की प्रतिरक्षा प्रणाली को स्वथ्य बनाने के लिए पशु – चिकित्सक की सलाह के अनुसार बूस्टर डोज़ दें l

क्या है रेबीज का निदान

हम कुत्ते को समय से टीका लगवाकर रेबीज होने से तो रोक सकते हैं लेकिन अगर कुत्ते में रेबीज की पुष्टि हो गयी तो उसे नहीं बचाया जा सकता है फिर तो कुत्ते की मौत निश्चित है इसलिए आप अपने कुत्ते और खुद अपनी व् अपने परिवार की सुरक्षा के लिए कुत्ते के रेबीज का टीका लगवाना न भूलें l

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क्या कुत्ते को रेबीज हो जाने के बाद बचाया जा सकता है ?

Ans- नहीं, अगर एक बार आपके कुत्ते में रेबीज की पुष्टि हो गयी तो फिर उसकी मौत निश्चित है l

क्या रेबीज सिर्फ कुत्तों में होता है ?

Ans- नहीं, रेबीज कुत्तों में सबसे ज्यादा और तेज़ी से होता है लेकिन ये किसी भी स्तनपायी को हो सकता है l

कुत्ते को रेबीज का टीका कब लगवाए ?

Ans- जब कुत्ते की उम्र तीन महीने की हो तब उसे एंटी रेबीज लगवाएं जिसका प्रभाव कुत्ते में एक साल तक रहता है l

रेबीज के लिए कौन सा वायरस जिम्मेदार है ?

Ans- रेबीज के लिए Lyssavirus जिम्मेदार होता है l

रेबीज का वायरस शरीर में कैसे असर डालता है ?

Ans- रेबीज का वायरस तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचता है l

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