मुर्गी के बारे में पूरी जानकारी हिंदी में Complete information about hen in Hindi

मुर्गी के बारे में पूरी जानकारी ( Complete information about hen )

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मुर्गी के बारे में पूरी जानकारी
मुर्गी के बारे में पूरी जानकारी

दोस्तों, आज हम इस लेख में आपको ‘मुर्गी के बारे में पूरी जानकारी’ दे रहे हैं और कैसे आप मुर्गी पालन कर सकते हैं इसके बारे में भी आपको अधिक से अधिक जानकारी देने की कोशिश कर रहे हैं।

हमारे आस-पास हमें कई सारे पशु-पक्षी देखने को मिलते हैं जिसमे से कई को हम अपने घरों में पालते हैं और उनसे कई प्रकार के लाभ भी लेते हैं जैसे अगर हम गाय या भैंस पालते हैं तो उससे हमें दूध मिलता है ऐसे ही अगर कुत्ता पालते हैं तो वह हमारी और हमारे घर की रखवाली करता है, उसी प्रकार मुर्गी पालने से हमें अंडा और मांस प्राप्त होता है।

मुर्गी के बारे में जानकारी ( Complete information about hen )

मुर्गी के बारे में पूरी जानकारी
मुर्गी के बारे में पूरी जानकारी

अन्य पक्षियों की तुलना में मुर्गी का आकर बड़ा होता है ये कई रंगों में पायी जाती हैं जैसे लाल, भूरी ,काली और सफ़ेद आदि। मुर्गियों के पंख होते हैं लेकिन ये ज्यादा ऊंचाई तक नहीं उड़ सकती हैं इन्हेंअपने पैरों पर चलना ही पसंद है। इनमे जो नर पक्षी होता है उसे मुर्गा तथा मादा को मुर्गी कहा जाता है इनके बच्चे चूजे कहलाते हैं।‘मुर्गी के बारे में पूरी जानकारी’ इसके सिर पर एक लाल रंग की कलगी होती है जिससे ये और पक्षियों से अलग दिखाई देती है।

मुर्गी की उम्र ( age of chicken )

मुर्गी के बारे में पूरी जानकारी
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वैसे आम-तौर पर मुर्गा या मुर्गी की उम्र 10 से 15 साल होती है लेकिन अगर हम बात करें ब्रायलर मुर्गी की तो वह केवल 24-25 दिन ही होती है।

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क्या खाती है मुर्गी ( What does the chicken eat )

मुर्गी के बारे में पूरी जानकारी
मुर्गी के बारे में पूरी जानकारी

मुर्गी एक सर्वाहारी पक्षी है ये खाने में दाना , फल-फूल और सब्जियां खाती है और इसके अलावा ये कीड़े-मकोड़े भी खा जाती है।

मुर्गी के बारे में रोचक तथ्य ( Interesting facts about hen )

मुर्गी के बारे में पूरी जानकारी
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आइये, अब मुर्गी के बारे में कुछ रोचक तथ्यों की बात करते हैं।

1- मुर्गियों की याददाश्त काफी तेज़ होती है वह अपनी प्रजाति में लगभग 100 मुर्गियों को अलग-अलग पहचान सकती हैं।

2- मुर्गियों अलग-अलग 24 प्रकार की आवाजें निकाल लेती है जिससे वह और मुर्गियों से बात करती है और उसकी हर अलग आवाज का अलग मतलब होता है।

3- अंटार्टिका को छोड़कर दुनिया में हर जगह मुर्गियां पायी जाती हैं।

4- मुर्गियां हमारी तरह सपने भी देखती हैं और सपने देखते समय इनकी आँखों की पुतलियाँ भी हरकत करती हैं।

5- मुर्गियां हमारी तरह रंगों को अलग-अलग देख सकती हैं।

6- कुत्ते, बिल्ली की तरह मुर्गियां भी अपना नाम पहचान सकती हैं।

7- मुर्गियों को धुप सेंकना बहुत पसंद है और ये खेलने के लिए इधर-उधर कूदती रहती हैं।

8- प्राकृतिक वातावरण में मुर्गियां 5 से 12साल आराम से जीती हैं।

9- समय का अंदाजा भी मुर्गियां लगा लेती हैं और इसके लिए ये सूरज की रौशनी का उपयोग करती हैं।

10- जिस तरह तनाव में हमारे बाल झड़ते हैं वैसे ही जब मुर्गी के पंख झड़ने लगे तो आप समझ लें मुर्गी किसी तनाव में है।

11- दुनिया भर में हर मिनट लाखों मुर्गियों को मार दिया जाता है।

12- मुर्गियां 26 घंटे में एक अंडे का निर्माण अपने पेट में कर लेती है।

13- मुर्गियों की पलकों की संख्या एक या दो नहीं बल्कि तीन होती है।

14- मुर्गियां सूरज की सहायता से रास्ते का पता लगा लेती हैं और अपने भोजन-पानी की व्यवस्था करने के बाद अपने स्थान पर लौट आती हैं।

15- मुर्गियां पानी में तैरना जानती हैं लेकिन गहरे पानी से ये डरती हैं और गहरे पानी में नहीं जाती है।

16- मुर्गी अगर अपने खाने से संतुष्ट नहीं है तो वह अपना अंडा भी खा सकती है।

17- मुर्गियों के बड़े होने के साथ-साथ उनके देने वाले अण्डों का आकर भी बड़ा हो जाता है लेकिन अंडे देने की संख्या घट जाती है।

18- अगर हम वर्ल्ड रिकॉर्ड की बात करें तो किसी मुर्गी के द्वारा एक ही दिन में दिए गए अण्डों की संख्या 7 है।

19- अगर एक मुर्गी 20 अंडे दे तो उसके लिए वह लगभग २ किलो भोजन खा लेगी।

20- मुर्गी ज्यादातर अंडे सुबह 7 से 11 बजे के बीच में देती है।

21- अपने चूजों को मुर्गी सिखाती है की उन्हें क्या खाना है और क्या नहीं खाना है।

22- मुर्गियां 15 किमी प्रति घंटे के रफ़्तार से दौड़ सकती हैं।

23- मुर्गी का सिर काटने के बाद भी वह एक फुटवाल के मैदान के बराबर भाग सकती हैं।

24- मुर्गी का दिल 220 से 360 प्रति मिनट धड़कता है।

25- ऐसा देखा गया है कि मुर्गी संगीत को सुनकर बड़े अंडे देती है।

26- किसी भी मुर्गी के द्वारा एक साल में दिए गए रिकॉर्ड अण्डों कि संख्या 371है।

मुर्गी पालन ( poultry )

मुर्गी के बारे में पूरी जानकारी
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मुर्गी से अंडे , चूजे और मांस लेने के लिए इनका पालन बड़े पैमाने पर किया जाता है इसे मुर्गी पालन या कुक्कुट पालन भी कहते हैं और इसके बिज़नेस के लिए आपको बहुत बड़ी पूंजी नहीं लगनी पड़ती है। ये किसी और दुसरे पशु-पालन से काफी ज्यादा आसान है।

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अंडे और मांस कि खपत को पूरा करने के लिए ही मुर्गी पालन किया जाता है और इसके लिए उन्नत किस्म की नस्लें तैयार की जाती हैं। मुर्गी के बारे में पूरी जानकारी अण्डों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए लेअर मुर्गी और मांस के उत्पादन को बढ़ाने के लिए ब्रायलर मुर्गी मुर्गियों को पाला जाता है।

अगर आज के परिदृश्य में बाज़ार की बात करें तो कुक्कुट उत्पाद प्रोटीन के मामले में सबसे सस्ते उत्पातद हैं। देसी मुर्गी, ब्रायलर मुर्गी से बिल्कुल अलग होती है इसे फ्री रेंज चिकन बोलते हैं। ये मुर्गियां ब्रायलर मुर्गियों की तुलना में बहुत शक्तिशाली होती हैं और इनका विकास ब्रायलर मुर्गियों की अपेक्षा बहुत धीमी गति से होता है।

मुर्गी के बारे में पूरी जानकारी
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फ्री रेंज चिकन को 1से 2 किलो तक का होने में 4 से 5 महीना लग जाता है और बाज़ार में ब्रायलर मुर्गियों की अपेक्षा इसकी कीमत भी ज्यादा होती है यहाँ तक की इसके अण्डों की भी कीमत ज्यादा होती है। सबसे अच्छी बात ये है कि ये दाना भी कम खाती हैं और इनके रहने के लिए भी कम जगह में ही काम चल जाता है क्योंकि ये कम जगह में भी आराम से रह लेती हैं।

मुर्गी पालन का बढ़ता महत्त्व ( Growing importance of poultry )

मुर्गी के बारे में पूरी जानकारी
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भारत के कृषि-प्रधान देश होने के कारण यहाँ लोग ज्यादातर पशु-पालन और कृषि पर निर्भर रहते हैं। पहले लोग पशु-पालन में गाय, भैंस, बकरी या भेड़ ज्यादा पालते थे और उसी से अपनी अतिरिक्त आय करते थे लेकिन आज के समय में देसी मुर्गियों को पालने में बहुत अच्छी अतिरिक्त आय मिल जाती है इसीलिए लोग तेज़ी से इसकी और आकर्षित हो रहे हैं और अच्छी आय कर रहे हैं।

मुर्गी पालन से फायदा ( Benefits of poultry farming )

मुर्गी के बारे में पूरी जानकारी
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ये तो सही है कि इसमें कम लागत से एक अच्छा फायदा लिया जा सकता है लेकिन ये सब कुछ आपकी मेहनत और लगन पर भी निर्भर करता है कि आप इससे कितना फायदा ले रहे हैं। आज भारत अण्डों के उत्पादन में तीसरे नंबर पर और इनके मांस के उत्पादन के मामले में पांचवें नंबर पर है। मुर्गी के बारे में पूरी जानकारी भारत में मुर्गी पालन का व्यवसाय बहुत तेज़ी से बढ़ता जा रहा है इसमें आप जितनी अच्छी तरह से मुर्गियों कि देखभाल करेंगे उतना ही फायदा आपको होना निश्चित है।

अगर मुर्गी पालन में एक सही नस्ल के चूजे, सही देखभाल, पौष्टिक आहार, साफ़-सफाई का ध्यान, बीमारियों से बचाव और समय से टीके लगवाएं जाएँ तो आप इस व्यवसाय से एक अच्छी आय प्राप्त कर सकते हैं। देसी मुर्गी के अंडे और मांस मनुष्य के स्वाथ्य के लिए उच्च प्रोटीन का स्रोत होते हैं इसलिए इनके अण्डों और मांस की उपलब्धता बाज़ार में हर समय बनी रहती है।

मुर्गी के बारे में पूरी जानकारी
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साथ ही मुर्गियों के कूड़े से खेतों की मिटटी से उपजाऊ बनाया जा सकता है क्योंकि जितना एक गाय के गोबर से एक खेत के लिए खाद तैयार की जा सकती है उतनी ही खाद 40 मुर्गियों के कूड़े से प्राप्त की जा सकती है तो ये भी एक आय का साधन बन जाता है। आज गावों में निम्न स्तर पर लोग कम लागत से मुर्गी पालन करके काफी फायदा कमा रहे हैं

देसी मुर्गी की मुख्य नस्लें ( Main breeds of indigenous chicken )

मुर्गी के बारे में पूरी जानकारी
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भारत में मुर्गियों की बहुत सी नस्लें हैं लेकिन इनमे से देसी नस्ल ही सबसे ज्यादा पाली जाती हैं। आइये जानते हैं कुछ प्रमुख देसी नस्लों की मूञों के बारे में।

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1- स्वरनाथ नस्ल ( Swarnath Breed )

इस नस्ल को कर्नाटक पसु चिकित्सा एवं मतस्य विज्ञानं और विश्वविद्यालय द्वारा विकसित किया गया था। ये मुर्गियां साल में 180 से 190 अंडे तक देती हैं और इन्हें आप बड़े आराम से अपने घर के पीछे भी पाल सकते हैं। ये 3 से 4 किलोग्राम की 22 से 23 हफ्ते में पूर्ण परिपक़्व होकर हो जाती हैं।

2- असेल नस्ल ( Aseel Breed )

मुर्गी के बारे में पूरी जानकारी
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उत्तर प्रदेश, राजस्थान और आंध्र प्रदेश में पायी जाने वाली ये नस्ल ईरान में भी पायी जाती है जहाँ इन्हें किसी दुसरे नाम से जाना जाता है। आपने मैदान में लोगों को मुर्गियों को लड़ाते हुए खूब देखा होगा तो ये यही मुर्गियां होती हैं क्योंकि ये बहुत ही ज्यादा झगड़ालू होती हैं। इस नस्ल के मुर्गे 4 से 5 किलो और मुर्गियां 3 से 4 किलो की हो जाती हैं। इनके अंडे देने की क्षमता बहुत कम होती है तथा गर्दन और पैर लम्बे होते हैं।

3- कड़कनाथ नस्ल ( Kadaknaath Breed )

वैसे इस नस्ल का नाम कलमासी है और यही इसका मूल नाम है इसका मतलब होता है काले मांस वाला पक्षी। मध्य प्रदेश में पायी जाने वाली इस नस्ल की मुर्गी में और सब नस्ल की मुर्गियों से ज्यादा प्रोटीन होता है जो 25 प्रतिशत होता है। अगर हम व्यवसाय की बात करें तो इस नस्ल की मुर्गियों को पालने में सबसे ज्यादा फायदा होता है क्योंकि इसके मांस का उपयोग कुछ प्रकार की दवाई बनाने में भी किया जाता है।

4- ग्रामप्रिया नस्ल ( Grampriya Breed )

मुर्गी के बारे में पूरी जानकारी
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हैदराबाद स्थित अखिल भारतीय समन्वय अनुसन्धान परियोजना के तहत भारत सरकार दवरा विकसित किया गया है ये मुर्गियां साल में 210 से 250 अंडे तक दे देती हैं जिनका रंग भूरा होता है। तंदूरी मुर्गा बनाने में इसी प्रजाति का उपयोग होता है। 12 हफ़्तों में ही इनका वजन डेढ़ से 2 किलो तक हो जाता है।

5-वनराजा ( Vanraja )

इस मुर्गी का वजन ढाई से पांच किलो तक पहुँच जाता है और ये तीन महीने में ही 120-130 अंडे दे देती हैं और पहले ज्यादातर इसी प्रजाति को पालना पसंद किया जाता था। ये प्रजाति और दूसरी प्रजातियों से कम सक्रीय होती है।

6- देवेंद्र नस्ल ( Devendra Breed )

मुर्गी के बारे में पूरी जानकारी
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ये नस्ल ब्रायलर से क्रॉस करके तैयार की गयी है और 12हफ्ते में ही इसका वजन 1800 ग्राम हो जाता है। ये साल में लगभग 200 अंडे दे देती हैं जिनका वजन 54 ग्राम होता है और 160 दिन में ये पूरी तरह से परिपक़्व हो जाती हैं।

7- श्रीनिधि नस्ल ( kshrinidhi )

ये मुर्गियां 210 से 230 अंडे साल भर में दे देती हैं और ढाई से पांच किलोग्राम तक इनका वजन हो जाता है। इनकी मुख्य विशेषता ये है कि इनका विकास तेज़ गति से होता है और ये दोहरी उपयोगिता वाली होती हैं अंडे और मांस का उत्पादन इनसे अधिक मात्रा में होता है।

8- चिटगॉन्ग नस्ल ( chittagong Breed )

मुर्गी के बारे में पूरी जानकारी
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इसे मलय चिकन के नाम से भी जाना जाता है और इसके गर्दन और पैर दूसरी नस्लों से लम्बे होते हैं। इस नस्ल के मुर्गे ढाई फिट तक लम्बे हो जाते हैं और मुर्गियों से साल में 70 से 120 अंडे तक प्राप्त किये जाते हैं।

9- केरी स्यामा नस्ल ( Kerry Syaama Breed )

ये केरी लाल और कड़कनाथ दोनों कीक्रॉस ब्रीड है। ये मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान में पायी जाती है और 24 हफ़्तों में पूरी तरह विकसित हो जाती है। इसके अंडे देने की क्षमता साल में केवल 80 अण्डों की ही होती है। इनका वजन नर का २ किलोग्राम और मादा का डेढ़ किलोग्राम तक ही होता है।

10- झारसीम नस्ल ( Jharsim Breed )

इस नस्ल को नाम झारखण्ड से प्राप्त हुआ है क्योंकि ये मूल रूप से झारखण्ड की ही प्रजाति है और कम भोजन के साथ तेजी से बढ़ने वाली नस्ल है। झारखण्ड की जनजातियां इस नस्ल को अधिक पालती हैं ये साल में 170 अंडे तक दे देती हैं और डेढ़ से दो किलोग्राम तक वजन रखती हैं।

11- कामरूप नस्ल ( Kaamroop Breed )

मुर्गी के बारे में पूरी जानकारी
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अखिल भारतीय समन्वय अनुसंधान परियोजना के तहत असं में मुर्गी पालन को बढ़ावा देने के लिए भारत सर्कार द्वारा इस नस्ल को तैयार किया गया है। इस नस्ल की अंडे देने की क्षमता 118 से 130 और अंडे कवजान 52 ग्राम होता है। 40 हफ़्तों के अंदर ये परिपक़्व होकर ये 1.8 से 2.2 किलोग्राम तक के हो जाते हैं।

12- पंजाब ब्राउन नस्ल ( Punjab Brown Breed )

पंजाब और हरियाणा के ग्रामीण इलाकों में इन मुर्गियों को देखा जाता है और ये मांस उत्पादन के लिए छोटे और बड़े किसानों के द्वारा पाली जाती हैं। ये मुर्गियां साल में 60 से 80 अंडे देती हैं और 5 से 7 महीने में अंडे देने के लिए तैयार हो जाती हैं।

भारत में कुछ अन्य नस्लें ( Some other breeds in India )

भारत में मुर्गियों की कुछ अन्य नस्लें इस प्रकार हैं।

1- कालास्थि

2- कश्मीर फेवरोला

3- अंकलेश्वर

4- कालाहांडी

5- कलिंगा ब्राउन

6- कृष्णा- जे

7- घाघस

8- डाँकी

9-तेलीचेरी

10-गुजरी

11- गरमलक्ष्मी

12- गिरिराज

13-कोमान

14-केरी गोल्ड

15- यमुना

16- बुसरा

17- धूमसील

18- डाओशीर

19-निकोबारी

20- धनराजा

21- हंसली

22-वंजारा

23-हरिगाटा ब्लैक

24-मिरी

25-वजागुड़ा

26-मृतुन्जय

मुर्गियों की देख-रेख ( Caring for Chickens )

यदि मुर्गीपालन योजनाबद्ध तरीके से किया जाए तो आप इससे एक अच्छी आय प्राप्त कर सकते हैं। इस व्यवसाय में तभी नुक्सान होता है जब मुर्गियां मरती हैं तो इसके लिए हमें कुछ तकनीकी चीजों पर ध्यान देना होगा और व्यवसायिक दृष्टि से मुर्गी पालने के लिए हमें इंसेंटिव पद्द्ति को अपनाना होगा।

अगर आप छोटे स्तर पर मुर्गी पालन कर रहे हैं तो इसके लिए आपको मुर्गियों के लिए शेड नहीं बनाना पड़ेगा लेकिन बड़े स्तर पर मुर्गी पालन के लिए आपको शेड बनाने की ज़रुरत पड़ेगी। मुर्गी के बारे में पूरी जानकारी आपका मुर्गी फार्म शहर या गॉंव से दूर हो जहाँ आबादी न हो और बिजली और पानी की पर्याप्त व्यवस्था हो। और इस बात पर ध्यान देना होगा कि मुर्गी फार्म ऊँची जगह पर हो जहाँ जल- भराव न हो सके।

मुर्गी के बारे में पूरी जानकारी
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जैविक सुरक्षा के नियम के साथ फार्म कि मध्य में ऊंचाई 12 फिट और साइड में 8 फिट होनी चाहिए साथ ही चौड़ाई अधिकतम 25 फिट होनी चाहिए। एक शेड से दुसरे शेड के बीच कम से कम 20 फिट की दूरी और फर्श पक्का होना चाहिए साथ ही दो पोल्ट्री फार्म एक साथ न हों। फार्म की लम्बाई पूरब से पश्चिम रखें।

एक शेड में एक ही ब्रीड रखें और इसके साथ ही कुत्ता, चूहा, गिलहरी और किसी दूसरों लोगों का प्रवेश बिल्कुल न होने दें। समय-समय पर छिड़काव और मरे चूजों और वेक्सीन की खाली बोतलों को नष्ट कर दें। टीकाकरण के नियमों का पालन करते हुए सही दवा का समय से उपयोग करें और पानी की उचित व्यवस्था करें।.

मुर्गियों के लिए जगह की आवश्यकता

मुर्गियों के लिए जगह की आवश्यकता इस बात पर निर्भर करेगी कि आपके फार्म में कितनी मुर्गियां या चूजे हैं लेयर मुर्गी के लिए 2.5 वर्ग-फिट यानी 1000 के लिए 250 वर्ग-फिट जगह ठीक रहेगी इसमें इन्हें आपस में चोट लगने का खतरा भी कम और बड़े होने के लिए भरपूर जगह मिल जाती है।

मुर्गियों का संतुलित आहार ( Balanced Diet of Chickens )

मुर्गी के बारे में पूरी जानकारी
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मुर्गी पालन में 70 प्रतिशत खर्चा आहार में ही आता है और चूजे से लेकर अंडा उत्पादन अगर आपने संतुलित आहार पर ध्यान नहीं दिया तो इसका असर अंडा उत्पादन पर पड़ेगा अत: आहार पर विशेष ध्यान दें।

अंडा देने वाली मुर्गियों के लिए आहार

स्टार्टर ( starter )

स्टार्टर एक से लेकर आठ हफ्ते तक दिया जाता है और इसके लिए मक्का 50 किलोग्राम,सोयाबीन मील 15 किलोग्राम, खाल 13 किलोग्राम,मछली चूरा 7 किलोग्राम, चावल दाना 18 किलोग्राम, खनिज मिश्रण 2 किलोग्राम और नमक 1 किलोग्राम होना चाहिए इसके अलावा इसमें प्रोटीन 18 से 20 प्रतिशत, एनर्जी 2600 से 2700 ME ( kcal/kg ) और कैल्शियम 1 प्रतिशत होना चाहिए।

ग्रोअर ( Grower )

स्टार्टर आठ से लेकर बीस हफ्ते तक दिया जाता है और इसके लिए मक्का 45 किलोग्राम,सोयाबीन मील 15 किलोग्राम, खल 12 किलोग्राम,मछली चूरा 7 किलोग्राम, चावल दाना 18 किलोग्राम, खनिज मिश्रण 2 किलोग्राम और नमक 1 किलोग्राम होना चाहिए इसके अलावा इसमें प्रोटीन 18 से 20 प्रतिशत, एनर्जी 2600 से 2700 ME ( kcal/kg ) और कैल्शियम 1 प्रतिशत होना चाहिए।

फिनिशर ( Finisher )

मुर्गी के बारे में पूरी जानकारी
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स्टार्टर बीस से लेकर आगे तक दिया जाता है और इसके लिए मक्का 48 किलोग्राम,सोयाबीन मील 15 किलोग्राम, खल 14 किलोग्राम,मछली चूरा 8 किलोग्राम, चावल दाना 11 किलोग्राम, खनिज मिश्रण 3 किलोग्राम और नमक 1 किलोग्राम होना चाहिए इसके अलावा इसमें प्रोटीन 18 से 20 प्रतिशत, एनर्जी 2600 से 2700 ME ( kcal/kg ) और कैल्शियम 3 प्रतिशत होना चाहिए।

रोगों के लिए टीकाकरण ( vaccination for diseases )

मुर्गी के बारे में पूरी जानकारी
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मुर्गियों को निम्न बीमारियों से बचने के लिए टीकाकरण इस प्रकार कराएं Complete information about hen,

प्रथम दिन

पहले दिन एचटीवी टीका 0.25 ml चमड़ी के नीचे दें।

दूसरे दिन से पांचवें दिन

दूसरे दिन से पांचवें दिन रानीखेत एफ-1 लसोटा टीका

14 वें दिन

गम्बोरो रोग के लिए आईबीडी टीका एक बूँद आँख में दें।

21 वें दिन

चेचक चेचक चेचक टीका 0.2 ml चमड़ी के नीचे दें।

28 वें दिन

28 वें दिन रानीखेत एफ-1 लसोटा टीका दें।

63 वें दिन

नौवें हफ्ते में रानी खेत बस्टर टीका पंख के नीचे चमड़ी में दें।

84 वें दिन

बारहवां हफ्ता में चेचक चेचक चेचक बूस्टर टीका 0.5 ml चमड़ी के नीचे दें।

अण्डों का रख-रखाव ( Maintenance of Eggs )

मुर्गी के बारे में पूरी जानकारी
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सबसे बड़ी चुनौती होती है अण्डों को सुरक्षित रखना और लम्बे समय तक रखने के लिए ये चुनौती और बड़ी हो जाती है। छोटे स्तर पर व्यवसाय करने वाले अण्डों को चूने के पानी में भिगोकर फिर उन्हें छांव में सुखा लेते हैं इससे अंडे काफी समय तक खराब नहीं होते हैं। अण्डों को बाज़ार में ले जाने के लिए अण्डों को रखने के लिए कूट बॉक्स का उपयोग करें जिससे वह टूटने से बचे रहें। अण्डों को तेज़ धुप से बचाकर रखना चाहिए।

मुर्गियों के लिए लिटर ( Litter for chickens )

मुर्गी के बारे में पूरी जानकारी
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मुर्गियों के लिए लिटर के लिए आप लकड़ी का बुरादा , धान का छिलका या मूंगफली का चुलका प्रयोग में ला सकते हैं। इसे आप फर्श पर चूजों के लिए कम से कम 4 इंच मोटा बिछा दें और इस बात का ध्यान रखें कि लिटर पूरी तरह से नया होना चाहिए उसमे किसी भी प्रकार का कोई संक्रमण न हो।

चिकन ब्रूडिंग (Chicken Brooding )

मुर्गी के बारे में पूरी जानकारी
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अण्डों से चूजों के निकलने के बाद उन्हें गर्म तापमान में रखा जाता है प्राकृतिक रूप से मुर्गी ये अपने चूजों को अपने पंख के नीचे दबाकर उन्हें गर्माहट देती है इसे ही चिकन ब्रूडिंग कहते हैं और इसका मुर्गी पालन में बड़ा महत्त्व होता है। अगर ठीक तापमान पर चूजों की ब्रूडिंग न हुई तो अच्छे से अच्छा आहार देने के बाद भी चूजों का विकास ठीक से नहीं होगा और वह कमजोर होकर मर जाएंगे।

ब्रूडिंग में तापमान का संतुलित होना बहुत ही आवश्यक है जिससे चूजों का विकास सही से होता है और कई बीमारियों से भी दूर रहते हैं साथ ही दाना और पानी भी ठीक से लेते हैं।

चिकन ब्रूडिंग के तरीके ( Chicken Brooding Methods )

आप चिकन ब्रूडिंग के लिए कई तरीके का उपयोग कर सकते हैं जो आपकी सुविधानुसार हो सकते हैं।

1-बिजली बल्ब द्वारा (By Electric Bulb )

मुर्गी के बारे में पूरी जानकारी
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अगर आपके पास बिजली की व्यवस्था है तो ये सबसे सही तरीका है आप बल्ब को चूजे से पहले हफ्ते 6 इंच ऊपर रखें और उसके बाद ऊंचाई 10 से 12 इंच बढ़ाएं। गर्मी के मौसम में प्रति चूजा एक वाट और सर्दियों में प्रति चूजा २ वाट बिजली की आवश्यकता होती है। जहाँ गर्मियों में मुर्गियों को 4 से 5 दिन तो वहीँ सर्दियों में 10 से 15 दिन तक ब्रूडिंग आवश्यक है।

2- गैस द्वारा ब्रूडिंग ( Brooding by Gas )

मुर्गी के बारे में पूरी जानकारी
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बाज़ार में क्षमता, उपयोग और आवश्यकता के अनुसार आपको गैस ब्रूडर मिल जाएंगे जो 1000 या 2000 पक्षी की क्षमता के अनुसार होंगे आप अपनी आवश्यकतानुसार ले सकते हैं ये शेड को जल्दी और सामान रूप से गर्म करेंगे।

3- अंगीठी द्वारा ब्रूडिंग ( Brooding by Fire )

मुर्गी के बारे में पूरी जानकारी
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इसके लिए आपको बहुत ज्यादा सावधनी बरतनी होगी वार्ना ज़रा सी लापरवाही से आग या शेड में धुंआ भरने का खतरा है। इसका उपयोग ज्यादातर ऐसे क्षेत्रों में किया जाता है जहाँ बिजली की व्यवस्था नहीं होती है।

FAQS मुर्गी के बारे में पूरी जानकारी

QUES-मुर्गी का भोजन क्या है ?

ANS- मुर्गी एक सर्वाहारी पक्षी है ये खाने में दाना , फल-फूल और सब्जियां खाती है और इसके अलावा ये कीड़े-मकोड़े भी खा जाती है।

QUES- मुर्गी कितना दाना खाती है ?

ANS- मुर्गी दिन भर में 100 से 120 ग्राम दाना खा जाती है।

QUES- मुर्गी को क्या खाने में दें जिससे उसकी ग्रोथ अच्छी हो ?

ANS- अगर हम प्रोबायोटिक्स पावडर मुर्गी के चूजों के दाने में मिलाकर दें तो उनकी ग्रोथ बहुत अच्छी और तेज़ी से होगी।

QUES- मुर्गी साल में कितने अंडे देती है ?

ANS- मुर्गी साल में कितने अंडे देती है ये उसकी प्रजाति पर निर्भर करता है। अगर हम देसी मुर्गी की बात करें तो वह साल में 80 से 300 अंडे तक देती हैं।

QUES-क्या मुर्गी मुर्गे के बिना अंडे देती है ?

ANS- मुर्गे के बिना मुर्गी द्वारा दिए अंडे से चूजे नहीं पैदा हो सकते हैं।

QUES- मुर्गी क्या हर दिन अंडा दे सकती है ?

ANS- हाँ, मुर्गी हर 26 घंटे में एक अंडा दे सकती है।

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